सुबह 4 बजे भारी पुलिस बल और जेसीबी के साथ गरीबों के आशियाने उजाड़ना भाजपा की क्रूरता का जीवंत उदाहरण..
सांसद और विधायक के झूठे आश्वासन की आड़ में सरकार ने पीठ में छुरा घोंपा…
आरंग: आरंग जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष खिलेश देवांगन ने रायपुर के नकटी गांव में प्रशासन द्वारा की गई बेदखली की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे महज एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की क्रूरता और धोखेबाजी का जीवंत उदाहरण बताया है।पूर्व जनपद अध्यक्ष देवांगन ने कहा कि सुबह 4 बजे जब पूरा प्रदेश सो रहा था, तब इस सरकार ने भारी पुलिस बल और दर्जनों जेसीबी के साथ 80 गरीब परिवारों के सिर से उनकी छत छीन ली। महिलाएं बिलखती रहीं, बच्चे भूख से तड़पते रहे और सरकार का बुलडोजर चलता रहा। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की आत्मा को झकझोर देने वाला है।
सांसद और विधायक के वादे निकले खोखले, जनता से हुआ विश्वासघात
पूर्व जनपद अध्यक्ष खिलेश देवांगन ने इस कांड के सबसे शर्मनाक पहलू को उजागर करते हुए कहा:“भाजपा के वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्थानीय विधायक अनुज शर्मा ने कुछ दिन पहले ही मीडिया के सामने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि ‘चिंता मत करो, किसी का घर नहीं टूटेगा।’ भोले-भाले ग्रामीणों ने उनकी बातों पर भरोसा कर लिया। लेकिन उसी भरोसे की आड़ में सरकार ने तड़के अंधेरे में हमला बोला। यह सिर्फ मकान तोड़ना नहीं है, बल्कि भाजपा के उस चरित्र का प्रमाण है जिसमें वे चुनाव के वक्त वादे करते हैं और सत्ता में आते ही गरीबों की पीठ में छुरा घोंप देते हैं।”
वोट के समय ‘वैध’, बुलडोजर चलाने के समय ‘अवैध’ क्यों..?
प्रशासन के 9 हेक्टेयर सरकारी जमीन के दावे पर सवाल उठाते हुए श्री देवांगन ने कहा कि पिछले 22 सालों से जब लोग यहां रह रहे थे, तब सरकार कहां सो रही थी? इन्हीं परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए गए, पानी की लाइन बिछाई गई, राशन कार्ड बनाए गए और यहाँ तक कि पांच नए हितग्राहियों के नाम आवास भी स्वीकृत किए गए। जब वोट लेने थे तब ये लोग वैध थे, और जब बुलडोजर चलाना था तो इन्हें अवैध घोषित कर दिया गया। यह सरकार का दोहरा मापदंड है।
संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: एक तरफ उजड़ते आशियाने, दूसरी तरफ अफसरों की दावत
कार्रवाई के दौरान की अमानवीय स्थिति को बयां करते हुए उन्होंने कहा कि मंजर बेहद दर्दनाक था। एक तरफ प्रशासनिक अमला जेसीबी के पास बैठकर नाश्ता और भोजन का आनंद ले रहा था, वहीं दूसरी तरफ जिनके घर उजड़ रहे थे, उनके बच्चे सुबह से भूखे-प्यासे तड़प रहे थे। इस दृश्य से पूरा प्रदेश उद्वेलित है, लेकिन अफसरों का दिल नहीं पसीजा।सरकार ने इन 80 परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 में बने इंडस्ट्रियल टीन शेडों में फेंक दिया है, जहाँ न तो दरवाजे हैं, न शौचालय और न ही सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम। क्या यही भाजपा का ‘गरीब कल्याण मॉडल’ है..?
पूर्व जनपद अध्यक्ष खिलेश देवांगन की प्रमुख मांगें:
पक्का मकान और मुआवजा: सभी 80 प्रभावित परिवारों को उसी स्थान पर या नवा रायपुर में पक्के मकान दिए जाएं और साथ ही 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
सार्वजनिक माफी: जनता को झूठा आश्वासन देकर गुमराह करने वाले सांसद और क्षेत्रीय विधायक सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
चेतावनी:
अंत में खिलेश देवांगन ने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “भाजपा सरकार कान खोलकर सुन ले। बुलडोजर से आप गरीब का घर गिरा सकते हैं, उनका हौसला नहीं। नकटी के लोगों के आंसुओं का हिसाब जनता भाजपा से जरूर लेगी। यह लड़ाई सिर्फ 80 घरों की नहीं, बल्कि प्रदेश के उस हर गरीब की है जिसके सिर पर आज भाजपा का बुलडोजर लटक रहा है।”

