रायपुर: छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून की बेरुखी ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में बारिश की भारी कमी के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे खरीफ फसलों की बुआई बुरी तरह प्रभावित हुई है। ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले इस राज्य में अब तक लक्ष्य के मुकाबले बेहद मामूली बुआई हो सकी है, जिससे कृषि विभाग से लेकर किसानों तक के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

बुआई के आंकड़े: पिछले साल के मुकाबले भारी गिरावट
कृषि विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में खरीफ फसलों की रफ्तार इस बार बेहद सुस्त है। जहाँ पिछले साल इस अवधि तक खेतों में रौनक लौट आई थी, वहीं इस साल मैदान सूखे पड़े हैं।

कुल खरीफ बुआई: प्रदेश में चालू सीजन के लिए निर्धारित 48.69 लाख हेक्टेयर के कुल लक्ष्य के मुकाबले अब तक महज 4.72 लाख हेक्टेयर (सिर्फ 9.7%) में ही बुआई हो सकी है।

धान की बुआई की स्थिति: राज्य की मुख्य फसल धान की बुआई इस बार केवल 11.1 प्रतिशत ही पूरी हो पाई है।
पिछले साल से तुलना: अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसी समय तक राज्य में 37% धान की बुआई पूरी हो चुकी थी। पिछले वर्ष के मुकाबले यह गिरावट बेहद डराने वाली है।

मानसून की बेरुखी: 26 जिलों में स्थिति गंभीर
मौसम वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण मानसून की चाल बिगड़ी है।
बारिश का संकट: राज्य में अब तक औसत से 62% कम बारिश दर्ज की गई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के 26 जिलों में 50% से अधिक वर्षा की कमी है। पानी की कमी के कारण खेत दरक रहे हैं और जिन किसानों ने शुरुआती दौर में बुआई कर दी थी, उनकी फसलें भी सूखने की कगार पर हैं।

कृषि विभाग की एडवायजरी: कम अवधि की फसलों पर जोर

बिगड़ते हालातों को देखते हुए कृषि विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग ने किसानों के लिए संकटकालीन रणनीति तैयार की है और पारंपरिक धान की खेती के बजाय वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह दी है:
दलहन और तिलहन पर फोकस: किसानों से अपील की जा रही है कि वे पानी की अधिक खपत वाले धान के बजाय दलहन (अरहर, मूंग, उड़द) और तिलहन (सोयाबीन, मूंगफली) की खेती को प्राथमिकता दें।
कम अवधि वाली फसलें: कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश होती भी है, तो किसान कम समय में तैयार होने वाली (Short-duration) फसलों की किस्मों का ही चयन करें ताकि नुकसान को कम किया जा सके।

कृषि अर्थव्यवस्था पर मंडराया बड़ा खतरा

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। अल नीनो के इस असर से न केवल खरीफ के कुल उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर भी टूट सकती है।
यदि अगले एक-दो सप्ताह के भीतर प्रदेश में अच्छी और व्यापक बारिश नहीं होती है, तो किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा, जिसका सीधा असर राज्य के बाजारों और समग्र कृषि जीडीपी (Agriculture GDP) पर पड़ना तय है। किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और आने वाले दिनों में मानसूनी बादलों के मेहरबान होने की दुआ कर रहे हैं।

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