आरंग : ग्राम पंचायत रसनी में 54 एकड़ (22 हेक्टेयर) बहुउद्देश्यीय शासकीय भूमि को ‘जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र’ को सौंपने के विरोध में 15 अगस्त को होने वाला नेशनल हाईवे का अनिश्चितकालीन चक्काजाम फिलहाल 10 दिनों के लिए टल गया है। स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक चर्चा के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया। आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा के नेतृत्व में बुलाई गई बैठक में पुलिस, उद्योग विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच विस्तृत वार्ता हुई। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो रसनी के ग्रामीण पुनः नेशनल हाईवे पर उतरकर बेमियादी चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।
बैठक में आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, सीएसपी लंबोदर पटेल, आरंग तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे,थाना प्रभारी हरीश साहू एवं उद्योग विभाग के प्रतिनिधि,रायपुर जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर एवं ग्राम पंचायत रसनी के स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विवाद की जड़: ग्राम सभा की अनदेखी का आरोप
विवाद की शुरुआत तहसीलदार आरंग द्वारा शासकीय भूमि (खसरा नं. 15, 16, 17, 33, 36, 37, 38, 50, 54, 57, 58, 248 एवं 250) को औद्योगिक प्रयोजन हेतु हस्तांतरित करने के अभिमत मांगने से हुई।
इस पर ग्राम पंचायत रसनी के सरपंच व ग्रामीणों ने विशेष ग्राम सभा आयोजित कर उद्योग विभाग को जमीन देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से खारिज कर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम सभा के निर्णय को सर्वोच्च प्राथमिकता प्राप्त है, फिर भी प्रशासन जबरन गांव की आरक्षित भूमि छीनने की कोशिश कर रहा है।
सार्वजनिक हितों और गांव के भविष्य पर खतरा
जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि यह 54 एकड़ बहुउद्देश्यीय भूमि गांव के भविष्य और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए बेहद जरूरी है। इस जमीन पर कई महत्वपूर्ण कार्य प्रस्तावित हैं।
प्रशासन को चेतावनी: 10 दिन का अल्टीमेटम
इससे पहले ग्रामीणों ने स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार करने और 15 अगस्त की सुबह 9 बजे से नेशनल हाईवे रोकने की लिखित चेतावनी दी थी।
प्रशासनिक आश्वासन के बाद राष्ट्रीय पर्व की गरिमा को ध्यान में रखते हुए चक्काजाम तो टाल दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों का रुख अब भी सख्त है। यदि 10 दिनों में जमीन आवंटन रद्द करने का आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तो आंदोलन दोबारा शुरू होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

