प्रदेश की सरकारों द्वारा शहरों के बुनियादी ढांचे को चमकाने और आवागमन को सुगम बनाने के नाम पर जनता के खून-पसीने की कमाई बहाकर बनाए गए ‘गौरव पथ’ आज घटिया निर्माण और प्रशासनिक संवेदनहीनता की मिसाल बन चुके हैं। आरंग शहर का मुख्य मार्ग इसका जीता-जागता प्रमाण है। आरंग के प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य बाजार और नगर पालिका सीमा तक फैला यह मार्ग आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस सड़क को नगर की ‘शान’ होना चाहिए था, वह आज स्थानीय नागरिकों और राहगीरों के लिए ‘जानलेवा पहेली’ बन चुकी है। तंग आकर अब लोग इसे ‘गौरव पथ’ नहीं, बल्कि ‘गड्डों का पथ’ कहने लगे हैं।

सियासत के खेल में पिस रही जनता: निर्माण में घोटाला, तो अब मरम्मत से तौबा..!

आरंग के इस गौरव पथ की बदहाली केवल एक सड़क का उखड़ना नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन के बीच पिसती जनता की दास्तान है। लगभग 3 साल पहले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में करीब 23 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इस सड़क का निर्माण कराया गया था। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। समुचित नाली निर्माण और जल निकासी (Drainage System) की व्यवस्था किए बिना ही बजट को ठिकाने लगा दिया गया। नतीजतन, 23 करोड़ का ‘गौरव’ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। प्रदेश में सत्ता बदली, व्यवस्था बदलने के बड़े-बड़े दावे हुए, लेकिन आरंग की किस्मत नहीं बदली। वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी जनता पर भारी पड़ रही है। सत्ता में आने के इतने महीनों बाद भी इस अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग की सुध न लेना वर्तमान शासन की इच्छाशक्ति और प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बड़ा सवाल: कांग्रेस सरकार में सड़क बनी तो घटिया बनी, और अब भाजपा सरकार है तो मरम्मत का अता-पता नहीं—आखिर जनता कब तक इन सियासी पैंतरेबाज़ियों और भ्रष्टाचार की सजा भुगतेगी.???

जरा सी बारिश और बन जाता है ‘स्विमिंग पूल’: सड़क में गड्ढा या गड्ढे में सड़क..?

आरंग में प्रवेश करते ही किसी विकास की नहीं, बल्कि कमर तोड़ देने वाले झटकों और जानलेवा गड्ढों से राहगीरों का स्वागत होता है। पानी भरा होने के कारण वाहन चालकों को यह समझ ही नहीं आता कि सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क।आए दिन दोपहिया वाहन चालक इन छिपे हुए गड्ढों में असंतुलित होकर गिर रहे हैं और गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। वहीं चार पहिया वाहन और ऑटो इन गड्ढों में फंसकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

नगर की ‘जीवनरेखा’ पर थम रही जिंदगी: हर वर्ग परेशान

आरंग का यह मुख्य मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि नगर की सामाजिक और आर्थिक जीवनरेखा है। हर सुबह स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर इस खतरनाक मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।आपातकालीन स्थिति में जब एम्बुलेंस इन जानलेवा गड्ढों से हिचकोले खाते हुए गुजरती है, तो अंदर तड़प रहे मरीज की सांसें अटक जाती हैं। रोजाना हजारों की संख्या में व्यापारिक वाहन और बसें इस मार्ग से गुजरती हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है और गाड़ियों के कलपुर्जे टूट रहे हैं।

जनता के सीधे व तीखे सवाल:

क्या किसी बड़े हादसे और मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार किया जा रहा है..?

कांग्रेस काल में हुए 23 करोड़ के इस निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई कब होगी..?

वर्तमान भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन आरंग की जनता को इस नारकीय स्थिति से कब मुक्ति दिलाएगा..?

सड़क सुधार और रखरखाव के नाम पर आने वाले सरकारी फंड की लीपापोती कब बंद होगी..?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

error: Content is protected !!