रायपुर: छत्तीसगढ़ में ‘नकटी विवाद’ थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच रायपुर लोकसभा क्षेत्र के वरिष्ठ सांसद और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का एक बेहद महत्वपूर्ण पत्र सामने आया है, जिसने राज्य के सियासी गलियारों और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।यह पत्र सीधे तौर पर आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी को संबोधित करके लिखा गया था, जिस पर अब तक कोई जवाब या ठोस कार्रवाई न होने की बात सामने आ रही है।

क्या है पूरा मामला?
सांसद बृजमोहन अग्रवाल के आधिकारिक लेटरहेड (क्रमांक S904/सांसद रायपुर लोकसभा/) से जारी इस पत्र की तारीख 19 जनवरी 2026 है। यह पत्र छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी को लिखा गया था। “हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पत्र की सत्यता और प्रामाणिकता की पुष्टि ‘द आरंग पोस्ट’ (The Arang Post) नहीं करता है।”
पत्र में सांसद ने उठाई ग्रामीणों की आवाज
पत्र के अनुसार, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नकटी ग्राम पंचायत के सरपंच श्री बिहारी यादव से मिले इनपुट के आधार पर मंत्री को वस्तुस्थिति से अवगत कराया था।पत्र में बताया गया है कि खसरा नंबर 460 (रकबा 15.4790 हेक्टेयर) भूमि ग्रामीणों के पूर्वजों द्वारा चारागाह के लिए छोड़ी गई थी। लेकिन समय के साथ परिवार बढ़ने के कारण अनेक परिवार वर्षों से इस भूमि पर रह रहे हैं और अब यह क्षेत्र एक घनी आबादी के रूप में विकसित हो चुका है। सांसद ने स्पष्ट रूप से चिंता जताई थी कि इस घनी आबादी वाली भूमि पर यदि हाउसिंग बोर्ड द्वारा ‘विधायक कॉलोनी’ का निर्माण किया जाता है, तो स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानियों और विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है। बृजमोहन अग्रवाल ने मंत्री ओ.पी. चौधरी से अनुरोध किया था कि इस पूरे प्रकरण का परीक्षण कराया जाए और नकटी में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण पर तत्काल रोक लगाते हुए इसे किसी अन्य स्थान (अन्यत्र) पर स्थानांतरित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए जाएं।
सियासी हलचल: ‘सांसद के पत्र’ पर ‘मंत्री की चुप्पी’ क्यों?
इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जनवरी 2026 में लिखे गए इस पत्र पर आज तक मंत्री ओ.पी. चौधरी या विभाग की तरफ से कोई जवाब क्यों नहीं दिया गया?
एक ही सत्ताधारी दल के कद्दावर सांसद द्वारा उठाए गए इतने संवेदनशील और जनहित से जुड़े मामले पर महीनों बाद भी कोई ठोस फैसला या संतोषजनक प्रतिक्रिया न आना, अब सरकार के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया है। नकटी के ग्रामीण लगातार इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं और अब इस गोपनीय पत्र के सामने आने से ग्रामीणों के आंदोलन को और बल मिलने की उम्मीद है।देखना यह होगा कि इस पत्र के सार्वजनिक होने और ‘नकटी विवाद’ के गहराने के बाद अब मंत्री ओ.पी. चौधरी और हाउसिंग बोर्ड इस पर क्या स्टैंड लेते हैं। क्या ग्रामीणों के घरों को बचाते हुए विधायक कॉलोनी को कहीं और शिफ्ट किया जाएगा? यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

