आरंग: राजनीति में वफादारी की कीमत अक्सर सम्मान से चुकाई जाती है, लेकिन आरंग नगर पालिका में सत्ताधारी दल ने इसके ठीक विपरीत मिसाल पेश की है।विगत दिनों हुई एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की घोषणा ने आरंग नगर के लोधी समाज को गहरे आक्रोश और ठगे जाने के अहसास से भर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इस घोषणा में समाज के एक भी योग्य चेहरे को जगह न मिलना, न केवल उनकी राजनीतिक उपेक्षा है, बल्कि बरसों की निष्ठा पर एक बड़ा कुठाराघात भी है।

आंकड़ों में ताकत, फिर भी प्रतिनिधित्व में शून्य:

यदि आरंग नगर पालिका के समीकरणों पर नजर डालें, तो लोधी समाज की ताकत को नजरअंदाज करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। नगर पालिका के कुल 17 वार्डों में से 04 वार्डों में लोधी समाज की भारी बहुलता और निर्णायक पकड़ है।वर्तमान में भी विषम परिस्थितियों के बावजूद समाज के 02 निर्वाचित पार्षद नगर पालिका में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
इतने मजबूत जनाधार और सामाजिक प्रभाव के बावजूद, जब सरकार में सीधे सहभागिता (एल्डरमैन मनोनीत करने) का अवसर आया, तो भाजपा और स्थानीय शीर्ष नेताओं को पूरे समाज में एक भी व्यक्ति इस पद के ‘लायक’ नजर नहीं आया। यह आरंग के लोधी समाज के बौद्धिक, सामाजिक और राजनीतिक नेतृत्व क्षमता का खुला अपमान है।

वफादारी का मिला यह कैसा सिला?

आरंग का इतिहास गवाह है कि लोधी समाज हमेशा से भारतीय जनता पार्टी के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहा है। चुनाव चाहे विधानसभा के हों, लोकसभा के हों या स्थानीय निकाय के—समाज ने तन-मन-धन से भाजपा की विचारधारा को सींचने और उसे जीत दिलाने का काम किया है। लेकिन विगत दिनों जारी हुई एल्डरमैन की सूची ने साफ कर दिया है कि भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस वफादारी को समाज की ‘मजबूरी’ समझ लिया है। नेताओं ने बंद कमरों में बैठकर अपनी व्यक्तिगत पसंद-नापसंद को तरजीह दी और उस समाज को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जो हर सुख-दुख में पार्टी का झंडा उठाए घूमता रहा।

समाज में सुलग रहा है आक्रोश

इस ऐतिहासिक उपेक्षा के बाद अब लोधी समाज खामोश बैठने के मूड में नहीं है। आरंग के सामाजिक गलियारों और युवाओं के बीच यह चर्चा तेज हो चुकी है कि यदि पार्टी को सिर्फ हमारे ‘वोट’ की जरूरत है, तो आने वाले समय में समाज को भी अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराना होगा।

बड़ा सवाल: जो नेता आज लोधी समाज के दम पर मलाईदार पदों और रसूख का आनंद ले रहे हैं, वे आगामी चुनावों में किस मुंह से समाज के बीच वोट मांगने जाएंगे..?? आरंग भाजपा के नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीति में कोई भी वोट बैंक स्थायी नहीं होता। वफादारी का जवाब यदि उपेक्षा और अपमान से दिया जाएगा, तो उसका खामियाजा भी भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। एल्डरमैन नियुक्ति में लोधी समाज की इस अनदेखी ने विरोध की जो चिंगारी सुलगाई है, वह आने वाले समय में आरंग भाजपा की राजनीतिक जमीन को हिलाने का दम रखती है। समाज अब जाग चुका है, और अपने हक की लड़ाई आर-पार के मूड में लड़ेगा।

 

आगामी 16 अगस्त को भाजपा समर्थन को लेकर बड़ा फैसला कर सकता है लोधी समाज 

लोधी समाज द्वारा निकाय चुनाव में लगातार अध्यक्ष टिकट की मांग संगठन से करते आ रहे हैं। पूरे आरंग विधान सभा से लोधी पारा के बूथों में सर्वाधिक मत पार्टी को प्रदान कर मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित समाज को अध्यक्ष के टिकट तो दूर उपाध्यक्ष, या मंडल, जिला के बड़े पदों पर आज तक नेतृत्व नहीं दिया गया। आगामी 16 अगस्त को अमर शहीद वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी जी का जन्मोत्सव कार्यक्रम है। यह दिन केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि इस बार लोधी समाज के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य की नई दिशा तय करने का केंद्र बिंदु बनने जा रहा है।
रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, महासमुंद सहित आसपास के कई जिलों के सामाजिक पदाधिकारी और प्रबुद्ध नागरिक इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुट रहे हैं। सूत्रों और सामाजिक चर्चाओं के अनुसार, इस मंच से भाजपा द्वारा की जा रही उपेक्षा के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया जा सकता है। समाज के भीतर इस बात को लेकर गहरी सुगबुगाहट है कि यदि भाजपा नेतृत्व ने अपनी रणनीति और रवैए में सुधार नहीं किया, तो भाजपा से जुड़े लोधी समाज के समस्त पदाधिकारी एक साथ सामूहिक इस्तीफे की घोषणा कर सकते हैं। यह कदम भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।

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