आरंग: छत्तीसगढ़ सरकार भले ही ‘गौधाम योजना’ और गोवंश संरक्षण के बड़े-बड़े दावे कर ले, लेकिन आरंग नगर पालिका क्षेत्र की ज़मीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। आलम यह है कि आरंग नगर पालिका क्षेत्र में मवेशियों के चरने के लिए एक इंच चारागाह की ज़मीन नहीं बची है। सैकड़ों हेक्टेयर शासकीय और चारागाह की भूमियों पर भू-माफियाओं और रसूखदारों का अवैध कब्ज़ा है, जिसे मुक्त कराने में नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। नतीजा..?? खरीफ फसल की बुआई शुरू होते ही किसानों का ‘संघर्ष’ और ‘रतजगा’ एक बार फिर शुरू होने वाला है।
भू-माफियाओं के हौसले बुलंद, मूकदर्शक बना प्रशासन
सूत्रों और स्थानीय दावों के मुताबिक, आरंग नगर पालिका के अंतर्गत आने वाली सैकड़ों हेक्टेयर बेशकीमती शासकीय भूमि आज अतिक्रमणकारियों के चंगुल में है। इसमें वह ज़मीनें भी शामिल हैं जो कभी मवेशियों के लिए चारागाह हुआ करती थीं। नगर पालिका प्रशासन की सुस्ती और कथित अनदेखी के कारण इन जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण और कब्ज़े हो चुके हैं। प्रशासन की इस नाकामी का सीधा खामियाजा क्षेत्र के अन्नदाता और बेजुबान पशुओं को भुगतना पड़ रहा है।

फसलों को बचाने ‘रतजगा’ करने की मजबूरी
खरीफ फसल की बुआई का काम जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। चारागाह नहीं होने के कारण सैकड़ों की संख्या में गोवंश भोजन की तलाश में भटकते रहते हैं और सीधे किसानों के खेतों में घुस जाते हैं।
किसानों का दर्द: “दिनभर खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करने के बाद हमें रात को लाठी थामकर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। ज़रा सी चूक हुई नहीं कि पूरी फसल मवेशी चर जाते हैं।”
आर्थिक नुकसान: हर साल आवारा मवेशियों के कारण किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है, जिसकी भरपाई करने वाला कोई नहीं है।

पशुपालक भी लाचार: चारे के संकट से बेसहारा हो रहे गोवंश
यह समस्या सिर्फ किसानों की नहीं बल्कि पशुपालकों की भी है। चारागाह खत्म होने से पशुपालकों के सामने चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बाज़ार से महंगा चारा खरीद पाना छोटे पशुपालकों के बस की बात नहीं है। ऐसे में भारी मन से पशुपालक अपने गोवंशों को खुले में छोड़ने के लिए मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल कृषि व्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं को भी आमंत्रण दे रही है।
कांजी हाउस और गौठान में महज़ ‘दिखावे’ का इंतजाम..?
नगर पालिका प्रशासन द्वारा हर साल आवारा मवेशियों को पकड़ने के लिए नगर पालिका कार्यालय के पास कांजी हाउस और बैहार तथा घुमराभाठा रोड स्थित गौठान में व्यवस्था की जाती है। लेकिन किसानों का कहना है कि यह राहत महज़ चंद दिनों की होती है।
“जब तक कोई बड़ा अधिकारी दौरा नहीं करता या दिखावा नहीं करना होता, तब तक मवेशियों को गौठान में रखा जाता है। कुछ दिन बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। नगर पालिका के पास इस स्थाई समस्या का कोई परमानेंट इलाज नहीं है।” — स्थानीय किसान
पिछले साल आरंग नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर किसानों ने किया था बड़ा प्रदर्शन
पिछले साल भी किसान आवारा मवेशियों से परेशान थे,किसान मवेशियों को घुमराभाठा रोड पर स्थित गौठान में लेकर जाते थे लेकिन अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कई बार गौठान का ताला तोड़कर मवेशियों को गौठान से निकाल दिया जाता था। गौठान से निकलते ही बड़ी संख्या में भूखे प्यासे मवेशी किसानों की खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते थे।शासन प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी नगर पालिका प्रशासन द्वारा कोई ठोस इंतजाम नहीं कराए जाने से नाराज किसानों ने बस स्टैंड आरंग से पैदल मार्च निकालते हुए आरंग नगर पालिका कार्यालय में घुसकर बड़ा प्रदर्शन किया था।

जनता का तीखा सवाल: कब जागेगा प्रशासन..?
आरंग की जनता और प्रबुद्ध नागरिकों का अब सब्र का बांध टूट रहा है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन समय रहते इन सैकड़ों हेक्टेयर शासकीय जमीनों को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराकर चारागाह के रूप में विकसित नहीं करता, तो आने वाले दिनों में किसानों का यह आक्रोश उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर ज़मीनी समस्या पर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर इस बार भी किसानों को अपनी फसलों की बलि चढ़ानी पड़ेगी।

