रायपुर: मिली जानकारी के मुताबिक, तीजन बाई पिछले काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उनकी बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें रायपुर के एम्स (AIIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पिछले 38 दिनों से वे आईसीयू (ICU) में जिंदगी की जंग लड़ रही थीं। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी और उन्हें बचाने के तमाम प्रयास किए जा रहे थे। परंतु, स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ और आज सुबह तड़के 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दिलाई पहचान

डॉ. तीजन बाई मात्र एक गायिका नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी की पहचान और लोक संस्कृति की अनमोल संवाहक थीं। उन्होंने पुरुष प्रधान माने जाने वाले पंडवानी गायन के ‘कापालिक शैली’ में कदम रखकर न केवल रूढ़ियों को तोड़ा, बल्कि अपनी कड़क आवाज, अद्वितीय अभिनय और हाथ में तंबूरा लिए महाभारत के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस पारंपरिक कला को देश के कोने-कोने से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों (पेरिस, लंदन, रूस आदि) तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का परचम लहराया।

पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से थीं सम्मानित

कला और लोक संस्कृति के क्षेत्र में उनके इस युगांतकारी और अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया था:

पद्मश्री (1988)

पद्म भूषण (2003)

पद्म विभूषण (2019)

इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनगिनत राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया था।

शासन-प्रशासन और दिग्गजों ने जताया गहरा शोक

तीजन बाई के निधन की खबर आते ही कला जगत के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी सन्नाटा पसर गया है। विभिन्न गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और कलाकारों ने इसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति के एक सुनहरे अध्याय का अंत बताया है। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

“पंडवानी की गूंज अब हमेशा के लिए शांत हो गई, लेकिन तीजन बाई अपने तंबूरे की झंकार और अपनी सशक्त आवाज के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा अमर रहेंगी।”

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