रायपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत मंदिरहसौद के समीपस्थ ग्राम नकटी में मानसून के बीच ‘विधायक कॉलोनी’ निर्माण के लिए वर्षों से बसे ग्रामीणों के मकानों को ढहाए जाने पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने इस बुलडोजर कार्रवाई को गरीब, दलित, सतनामी और ओ.बी.सी. समाज के खिलाफ घोर अन्यायपूर्ण एवं अमानवीय करार दिया है।मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. डहरिया ने कहा कि ” मानसून के मौसम में लोगों के सिर से छत छीन लेना किसी भी संवेदनशील और लोकतांत्रिक सरकार को शोभा नहीं देता। जब परिवारों को सबसे अधिक सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता होती है, ऐसे समय में बिना किसी पूर्व और समुचित पुनर्वास के मकानों पर बुलडोजर चलाना मानवीय संवेदनाओं का कत्ल है। आज वहां महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।”
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर दागे तीखे सवाल
पूर्व मंत्री ने शासन और प्रशासन के दावों को आड़े हाथों लेते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
सालों तक मौन क्यों रहा प्रशासन..? यदि वह भूमि वास्तव में सरकारी थी और उस पर अवैध कब्जा था, तो सालों तक प्रशासन और सरकार गहरी नींद में क्यों सोए रहे..?
सरकारी योजनाओं की स्वीकृति का आधार क्या था..? यदि वह बस्ती अवैध थी, तो वहां के निवासियों को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘इंदिरा आवास योजना’ के तहत मकानों की स्वीकृति किस आधार पर दी गई..?
सुविधाएं देने के बाद बेदखली क्यों..? जब वहां बिजली, पानी, सड़क, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य सभी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, तो आज अचानक वह जगह अवैध कैसे हो गई..?
“चुनाव में वोट वैध, तो आज घर अवैध क्यों..?”
डॉ. डहरिया ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के समय इन्हीं गरीब परिवारों के वोट वैध माने जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके आशियाने अवैध घोषित कर दिए जाते हैं। यदि शासन-प्रशासन वर्षों तक इस बस्ती को मान्यता देता रहा, तो अचानक इन गरीबों को ‘अतिक्रमणकारी’ बताकर बेदखल करना किसी भी नजरिए से न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों के लिए ‘विधायक कॉलोनी’ बनाने के नाम पर गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का पहला दायित्व प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना होता है। लेकिन यहां उल्टी गंगा बह रही है—पहले बुलडोजर चलाकर बेघर किया गया और अब पुनर्वास की खोखली बातें की जा रही हैं।
डॉ. डहरिया ने मांग की है कि:
सरकारी रिकॉर्ड की जांच हो: सरकार यह स्पष्ट करे कि यदि नकटी गांव अवैध था, तो प्रधानमंत्री आवास की किस्तें किस आधार पर जारी हुईं और सरकारी रिकॉर्ड में लोगों के नाम कैसे दर्ज हुए?
कार्रवाई पर तुरंत रोक लगे: नकटी गांव में चल रही बेदखली की इस दमनकारी कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
सम्मानजनक पुनर्वास और निष्पक्ष जांच: सभी प्रभावित परिवारों का पहले सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए और इस पूरी असंवेदनशील कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पूर्व मंत्री ने अंत में कहा कि बरसात के मौसम में गरीबों को बेघर कर रसूखदारों के लिए कॉलोनी बनाना सामाजिक न्याय, मानवीय संवेदनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

