छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद, प्रखर समाजसेविका और सतनामी समाज की पूज्य गुरुमाता ममतामयी मिनीमाता जी की 54वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सतनामी समाज आरंग द्वारा गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नगर के गुरु घासीदास बाबा मंदिर परिसर में सादगी और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।कार्यक्रम के शुभारंभ में सतनामी समाज के प्रबुद्धजनों एवं पदाधिकारियों ने ममतामयी मिनीमाता जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें शत-शत नमन किया। इस दौरान वातावरण “ममतामयी मिनीमाता अमर रहें” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए समाज के वक्ताओं ने मिनीमाता जी के जीवन-वृत्त, सामाजिक योगदान और उनके ऐतिहासिक कार्यों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि मिनीमाता जी ने अपना संपूर्ण जीवन दलितों, शोषितों, महिलाओं और पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।छत्तीसगढ़ में बाल विवाह, अस्पृश्यता जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और शिक्षा के प्रचार-प्रसार में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है।वे सादगी, करुणा और ममता की प्रतिमूर्ति थीं। समाज को उनके द्वारा दिखाए गए सत्य, अहिंसा और समानता के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। इस गरिमामय आयोजन में सतनामी समाज आरंग के अनेक पदाधिकारी, वरिष्ठ नागरिक एवं युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। जिनमें प्रमुख रूप से अध्यक्ष गणेश बांधे, खेमलाल खेलवार, दसरथ पुरैना, शिव खेलवार, शंकर खेलवार, राजेश भीमफोर, नंदकुमार ढीढी, करण भीमफोर, भावेश पुरेना, संतोष ढीढी, हीरालाल खेलवार, बृजमोहन खेलवार, पुणेश्वर घृतलहरे, अजय भारद्वाज, चंद्रशेखर घृतलहरे, पुन्नी टंडन, पुन्नी घृतलहरे, तीरथ बाई सहित सतनामी समाज के अन्य गणमान्य नागरिक एवं माताएँ-बहनें उपस्थित थीं।

