आरंग: 9 जुलाई को आरंग विधानसभा क्षेत्र के नगर पंचायत समोदा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दौरा तय होते ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों में जो हलचल मची है, वह किसी फिल्म के क्लाइमैक्स से कम नहीं है। कल तक कुंभकर्णी नींद सो रहे विभाग के इंजीनियरों ने अब रातों-रात सड़कों का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया है—पर अफसोस, यह कायाकल्प विकास के लिए नहीं, बल्कि साहब की ‘नाराजगी’ से बचने के लिए है।

‘समोदा’ की सड़क: गड्ढों का महाकुंभ और डामर का दिखावा
रानीसागर से समोदा तक की सड़क इस समय किसी खतरनाक एडवेंचर ट्रैक से कम नहीं है। यहाँ सड़क कम और ‘गड्ढों का संग्रहालय’ ज्यादा नजर आता है। मानसून की पहली बारिश क्या हुई, सड़क ने अपना असली चेहरा दिखा दिया। लेकिन मुख्यमंत्री के आगमन की आहट मिलते ही विभाग के अधिकारी जाग गए हैं। गड्ढों को भरने के नाम पर जो ‘ऑपरेशन’ चल रहा है, उसे देखकर स्थानीय लोग भी दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। वैज्ञानिक तरीके से सड़क मरम्मत करने के बजाय, इन पर गिट्टी और डामर का ऐसा पतला लेप लगाया जा रहा है जैसे कोई बच्चा पेंटिंग कर रहा हो। यह मरम्मत ऐसी है कि मुख्यमंत्री का काफिला निकलते ही यह परत ‘टा-टा बाय-बाय’ कह देगी।

रेत माफिया और अफसरशाही का ‘अटूट बंधन’
इस सड़क की दुर्दशा का असली राज क्या है? रायपुर जिले की सबसे ज्यादा रेत खदानें इसी मार्ग पर स्थित हैं। भारी-भरकम रेत से लदे ट्रक दिन-रात इस सड़क की हड्डियां तोड़ते रहते हैं। विभाग के अधिकारियों को सालों से पता है कि सड़क का ‘दम’ कितना है, लेकिन तब वे आंखें मूंदे बैठे थे। शायद उन्हें इंतज़ार था कि जब सड़क पूरी तरह ‘दम’ तोड़ देगी, तभी वे ‘मरम्मत’ के नाम पर बजट का चूना लगाएंगे।

हादसे: सिर्फ आंकड़ों में दर्ज, विभाग की फाइलों में गुम
खराब सड़क के कारण यहाँ आए दिन हादसे हो रहे हैं, लोग गिर रहे हैं, चोटिल हो रहे हैं, लेकिन PWD के लिए ये सिर्फ आम जनता की समस्याएं हैं। इनकी प्राथमिकता में सड़क की मजबूती नहीं, बल्कि ‘दौरे की सफलता’ है। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री का दौरा खत्म होते ही यह सड़क फिर से मौत का कुआं बन जाएगी..?

जनता का सवाल: विकास या सिर्फ दिखावा..?
09 जुलाई को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आरंग विधानसभा के समोदा में विकास कार्यों की सौगात देने आ रहे हैं। क्या वे इस ‘लीपापोती’ वाली सड़क को देखकर अपनी पीठ थपथपाएंगे, या उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे जिन्होंने जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह गड्ढों में बहा दिया..?

