आरंग: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही आरंग विकासखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर निजी व्यापारियों द्वारा खाद की जमकर कालाबाजारी की जा रही है। क्षेत्र में यूरिया और डीएपी (DAP) की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दुकानदार किसानों से दोगुनी कीमत वसूल रहे हैं। आलम यह है कि विरोध करने पर किसानों को खाद देने से साफ मना कर दिया जाता है, जिससे बेबस अन्नदाता ऊंचे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर है।मिली जानकारी के अनुसार आरंग, समोदा और मंदिरहसौद के बाजारों में सरकारी और निर्धारित मूल्यों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। किसानों को मिलने वाली राहत पर मुनाफाखोर डाका डाल रहे हैं।

लूट का नया तरीका: बिल सरकारी रेट का, वसूली नगद

दुकानदारों ने कार्रवाई से बचने का एक शातिर तरीका निकाल लिया है। वे किसानों को बिल तो सरकार द्वारा तय किए गए निर्धारित मूल्य का ही थमाते हैं, लेकिन जेब से अतिरिक्त राशि नगद वसूलते हैं। कागजों पर सब कुछ सही दिखाने के इस खेल के कारण भोले-भाले किसान कानूनी तौर पर भी शिकायत करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।

“अगर हम विरोध करते हैं, तो दुकानदार सीधे कह देते हैं कि खाद नहीं है, जहाँ जाना है जाओ। खेती का समय निकला जा रहा है, अगर समय पर खाद नहीं डाली तो फसल बर्बाद हो जाएगी। मजबूरी में हमें कर्ज लेकर दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है।”

— पीड़ित किसान, आरंग क्षेत्र

 

कृषि विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

आरंग, समोदा और मंदिरहसौद के विभिन्न क्षेत्रों में दुकानदारों की इस मोटी कमाई और खुलेआम चल रही लूट ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीजन के दौरान उड़नदस्ता टीमों द्वारा की जाने वाली आकस्मिक जांच और निगरानी धरातल पर गायब नजर आ रही है। किसानों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों के संरक्षण के बिना इतनी बड़ी कालाबाजारी संभव नहीं है।

अन्नदाता पर दोहरी मार:

एक तरफ मानसून की अनिश्चितता और दूसरी तरफ लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। यदि समय रहते प्रशासन ने इन मुनाफाखोरों पर नकेल नहीं कसी और उचित मूल्य पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कराई, तो क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसानों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इन क्षेत्रों की दुकानों पर तत्काल छापेमारी की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

error: Content is protected !!