रायपुर: माना क्षेत्र के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कालोनी के लिए प्रशासन ने 80 घरों पर बुलडोजर कार्रवाई कर जमींदोज कर दिया।प्रशासन ने इस बेदखली की कार्रवाई को बेहद गोपनीय और रणनीतिक तरीके से अंजाम दिया: किसी भी तरह के उग्र विरोध से निपटने के लिए रविवार आधी रात से ही वार्ड नंबर 16 और 17 को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। रायपुर के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी खुद मौके पर मोर्चा संभाले हुए थे। सोमवार सुबह जैसे ही राजस्व विभाग की टीम जेसीबी और बुलडोजर लेकर पहुंची, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोग मशीनों के आगे लेट गए। पुलिस और ग्रामीणों के बीच भारी धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ, लेकिन भारी बल के आगे ग्रामीणों की एक न चली। महज 4 घंटों के भीतर पूरा इलाका मलबे के ढेर में तब्दील हो गया।

राजनेताओं के खोखले आश्वासन और टूटता भरोसा
इस पूरी कार्रवाई का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि प्रभावित ग्रामीण महज दो दिन पहले तक खुद को सुरक्षित मान रहे थे क्योंकि:
27 जून (सांसद का आश्वासन): रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों और मीडिया से स्पष्ट कहा था कि बरसात के मौसम में किसी का भी आशियाना नहीं उजाड़ा जाएगा।
विधायक का वीडियो संदेश: स्थानीय विधायक अनुज शर्मा ने भी एक वीडियो जारी कर दावा किया था कि वे नकटी की जनता के साथ खड़े हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपने जनप्रतिनिधियों के झांसे में आ गए। उन्हें लगा कि उनके घर बच जाएंगे, लेकिन 29 जून की सुबह प्रशासन ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं को जनता की परवाह नहीं है, वे अपनी आलीशान कोठियों (विधायक कॉलोनी) के लिए गरीबों के सपने उजाड़ रहे हैं।

ग्रामीणों के तीखे सवाल: “जब अवैध था, तो सरकारी पैसा क्यों दिया..???”
इस कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेदखल हुए परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से सीधे सवाल पूछ रहे हैं: सरकारी योजनाओं की राशि क्यों जारी हुई..? यदि यह जमीन अवैध कब्जा थी, तो सरकार ने खुद आगे बढ़कर यहाँ ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘इंदिरा आवास योजना’ के तहत पक्के मकान बनाने के लिए लाखों रुपये की राशि क्यों स्वीकृत और जारी की..? सालों तक क्यों सोता रहा प्रशासन..? जब गरीब यहाँ सालों से अपने पक्के मकान बनाकर रह रहे थे, तब राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन चुप क्यों बैठा रहा..?

प्रशासन का पक्ष: पुनर्वास की तैयारी शुरू
बढ़ते बवाल, जनआक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कर दी हैं। प्रशासन का दावा है कि बेघर हुए परिवारों को लावारिस नहीं छोड़ा जाएगा।प्रभावित परिवारों के पुनर्वास (Rehabilitation) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।इन परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 में स्थित ईडब्ल्यूएस (EWS) मकानों में शिफ्ट किया जाएगा।इसके लिए आवास आवंटन की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।
कागजों पर इसे भले ही ‘अवैध कब्जा हटाओ अभियान’ का नाम दिया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस कार्रवाई ने व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर कर दिया है। एक तरफ सरकार गरीबों को घर देने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी प्रोजेक्ट्स के लिए उन्हीं पक्के सरकारी घरों पर बुलडोजर चला दिया जाता है। नया रायपुर में पुनर्वास की घोषणा के बावजूद, नकटी गांव के इन 80 परिवारों के लिए यह मानसूनी बारिश आशियाने के बिना बेहद दर्दनाक साबित होने वाली है।

