आरंग: नगर के ऐतिहासिक और जन-उपयोगिता वाले जलस्रोतों पर प्रदूषण का ग्रहण लगातार गहराता जा रहा है। आरंग के सबसे बड़े झलमला तालाब में पहले ही रासायनिक तत्वों के मिलने से उसका पानी निस्तारी (घरेलू उपयोग) के लायक नहीं रह गया था। इस संकट के बाद, नगरवासी अपनी दैनिक निस्तारी आवश्यकताओं के लिए एकमात्र साफ पानी के स्रोत वार्ड नंबर 02 स्थित दमऊवा तालाब पर निर्भर थे। लेकिन अब दमऊवा तालाब का अस्तित्व भी गंभीर खतरे में नजर आ रहा है, जिससे पूरे नगर में आक्रोश और चिंता का माहौल है।

तालाब में तैरती रासायनिक परत, तस्वीरों में कैद हुआ सच

तालाब के किनारों पर हरे और मटमैले रंग के रसायनों की मोटी परत तैरती हुई साफ देखी जा सकती है। पानी पूरी तरह से दूषित हो चुका है और किनारे पर कचरे का अंबार लगा हुआ है। एक बोतल में भरे गए तालाब के पानी का सैंपल साफ तौर पर गाढ़े हरे रंग के केमिकल युक्त पानी को दर्शाता है, जो इसके पूरी तरह से अनुपयोगी होने की गवाही दे रहा है।

धीरे-धीरे पानी के दूषित होने से नगरवासियों की चिंता चरम पर पहुंच गई है। लोगों का कहना है कि अगर यह तालाब भी प्रदूषित हो गया, तो आरंग में निस्तारी के लिए पानी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए केमिकल डालने की आशंका

दमऊवा तालाब में अचानक फैले इस प्रदूषण को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। आम जनता के बीच यह आशंका तेजी से फैल रही है कि मछली उत्पादन को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए तालाब में हानिकारक रासायनिक तत्व या रासायनिक खाद डाली गई है। इस वजह से तालाब का साफ पानी जहर में तब्दील हो रहा है।

शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन, मौके पर पहुंचे अधिकारी और पार्षद

तालाब के पानी में केमिकल दिखने और जनता के बढ़ते विरोध के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया।शिकायत मिलते ही आरंग के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) राम संजीवन सोनवानी और नगर पालिका के इंजीनियर केशनाथ साहू तुरंत जांच के लिए मौके पर पहुंचे। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने भी संवेदनशीलता दिखाई। वार्ड क्रमांक 02 के पार्षद उमाकांत यादव,03 के पार्षद नरेंद्र लोधी और वार्ड 10 के पार्षद संतोष लोधी भी ग्राउंड जीरो पर मुस्तैद रहे और उन्होंने अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग की।

मामले में आरंग सीएमओ राम संजीवन सोनवानी ने कहा कि “तालाब के पानी में मिले संदेहास्पद रासायनिक तत्वों के सैंपल ले लिए गए हैं। इस सैंपल को जल्द ही जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मछली पालन समिति ने दी सफाई: “दोषी पाए गए तो छोड़ देंगे मछली पालन”

दूसरी तरफ, इस मामले में मछली पालन करने वाली स्थानीय समिति के अध्यक्ष ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।समिति अध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने तालाब में किसी भी प्रकार का केमिकल या रासायनिक खाद नहीं डाला है।उन्होंने प्रशासन को आश्वस्त करते हुए कहा, “यदि जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि तालाब में हमारे द्वारा कोई रासायनिक तत्व या खाद डाली गई है, तो हम इस तालाब में दोबारा कभी मछली पालन नहीं करेंगे।”

नगरवासियों की मांग: जल स्रोतों का संरक्षण करे प्रशासन

आरंग के नागरिकों का कहना है कि प्रशासन केवल जांच का आश्वासन न दे, बल्कि जलस्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कड़े कदम उठाए। झलमला तालाब के बर्बाद होने के बाद दमऊवा तालाब ही लोगों का एकमात्र सहारा था। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आरंग के लोगों को भारी जल संकट का सामना करना पड़ेगा। अब सभी की निगाहें लैब टेस्ट की रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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