आरंग: क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम वृष्टि (अच्छी बारिश) की कामना को लेकर लक्ष्मी विहार स्थित श्रीधाम (परमेश्वर महादेव मंदिर के समीप) में आयोजित पांच दिवसीय भव्य धार्मिक अनुष्ठान का शनिवार को आस्था और उत्साह के साथ समापन हो गया। 29 जून से शुरू हुए इस लोक कल्याणकारी महायज्ञ की पूर्णाहुति 4 जुलाई को हुई। विशेष संयोग यह रहा कि जैसे ही अनुष्ठान की पूर्णाहुति हुई, वैसे ही क्षेत्र में राहत की रिमझिम फुहारें बरस पड़ीं, जिसे श्रद्धालुओं ने महादेव की साक्षात कृपा और आशीर्वाद माना। यह पूरा आयोजन प्रख्यात भगवताचार्य पं. सत्यम दीवान के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें उन्होंने स्वयं मुख्य यजमान की भूमिका निभाकर पूजा-अर्चना संपन्न की।
मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ वातावरण, गन्ने के रस से हुआ अभिषेक
पंच दिवसीय इस दिव्य अनुष्ठान में वैदिक विद्वान आचार्य पं. जगन्नाथ तिवारी, पं. बद्रीनाथ तिवारी और पं. अमन शर्मा के सान्निध्य में महामृत्युंजय मंत्रों का अनवरत जाप और विशेष शिव अभिषेक किया गया।
- चौथा दिन: भगवान भूतभावन भोलेनाथ का केसर युक्त जल से दिव्य अभिषेक किया गया।
- पांचवा दिन (अंतिम दिवस): द्वादश ज्योतिर्लिंग स्वरूप महादेव का गन्ने के रस से महाअभिषेक किया गया।
आचार्यों के मुखारविंद से निकले उच्च स्वर के वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से पूरा परिसर शिवमय हो गया। उपस्थित श्रद्धालु भक्ति के सागर में सराबोर नजर आए।
महायज्ञ की पूर्णाहुति में उमड़े दिग्गज और श्रद्धालु
4 जुलाई को वैदिक रीति-रिवाज और हवन-पूजन के साथ इस महाअनुष्ठान की पूर्णाहुति दी गई। इस पावन अवसर पर धर्म और समाज जगत से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- आचार्य गजेंद्र तिवारी (गुल्लू)
- भगवताचार्य पं. भागीरथी तिवारी (अभनपुर)
- भगवताचार्य पं. छत्रधर दीवान
- अरुण साहू (रसनी), दीपक साहू, कमलेश पटेल, सन्नी देवदास, अन्नू सोनी, लता पेठे, किरण दीवान सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु।
भजन गंगा में डुबकी लगाते रहे भक्त, देर रात तक बंटा प्रसाद
संध्या बेला में मंदिर परिसर में भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसके बाद महाआरती उतारी गई। इसके पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को महाप्रसाद का वितरण किया गया।
मौसम के बदले मिजाज और रिमझिम बारिश के बीच भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। मध्य रात्रि तक श्रद्धालुजन भक्ति संगीत और भजन गंगा में डुबकी लगाते रहे। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि इस अनुष्ठान के प्रभाव से ही भीषण गर्मी के बाद क्षेत्र को राहत की बूंदें नसीब हुई हैं।

