आरंग: नगर के प्राचीन जलस्रोतों में रासायनिक प्रदूषण और लगातार फैलती गंदगी के खिलाफ “The आरंग Post” द्वारा उठाई गई आवाज का बड़ा और व्यापक असर देखने को मिला है। खबर प्रकाशित होने और स्थानीय नागरिकों के बढ़ते आक्रोश के बाद नगर पालिका प्रशासन और पर्यावरण विभाग हरकत में आ गया है।गुरुवार को आरंग के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) राम संजीवन सोनवानी की विशेष पहल पर पर्यावरण विभाग की जांच टीम धरातल पर पहुंची। टीम ने आरंग के सबसे बड़े निस्तारी तालाब झलमला और वार्ड क्रमांक 02 स्थित दमऊवा तालाब का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया।

दमऊवा और झलमला तालाब से पानी के सैंपल लिए गए

निरीक्षण के दौरान पर्यावरण अधिकारियों ने दोनों तालाबों के पानी का मुआयना किया, जहाँ सतह पर हरे और मटमैले रसायनों की परत व कचरा दिखाई दे रहा था। अधिकारियों ने पानी की गुणवत्ता की सटीक जांच के लिए दोनों तालाबों से जल सैंपल एकत्र किए हैं, जिन्हें लैब में परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।

पर्यावरण अधिकारियों की चेतावनी:

“तालाबों में व्याप्त प्रदूषण और गंदगी चिंताजनक है। जल गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निकायों को इनकी नियमित सफाई करनी होगी। झलमला तालाब में तेजी से फैल रही जलकुंभी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।”

क्या था पूरा मामला..?

उल्लेखनीय है कि झलमला तालाब का पानी पहले से ही रासायनिक प्रदूषण के कारण अनुपयोगी हो चुका था। इसके बाद नगरवासी अपनी दैनिक निस्तारी आवश्यकताओं के लिए दमऊवा तालाब पर आश्रित थे। लेकिन हाल ही में दमऊवा तालाब में भी रसायन तैरते दिखने और गाढ़े हरे रंग का पानी होने से जनता का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने संदेह जताया था कि मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए तालाब में हानिकारक केमिकल या खाद डाली गई है।दूसरी ओर, स्थानीय मछली पालन समिति के अध्यक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि जांच में समिति दोषी पाई जाती है, तो वे दोबारा कभी वहाँ मछली पालन नहीं करेंगे।वार्ड 02 के पार्षद उमाकांत यादव, वार्ड 03 के पार्षद नरेंद्र लोधी और वार्ड 10 के पार्षद संतोष लोधी ने भी मौके पर रहकर तुरंत कड़े कदम उठाने की मांग की थी।

लैब रिपोर्ट पर टिकीं नगरवासियों की निगाहें

प्रशासनिक सक्रियता और पर्यावरण विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से आरंग के नागरिकों ने राहत की सांस ली है और “The आरंग Post” की जनहितैषी पत्रकारिता की सराहना की है। अब पूरे नगर की निगाहें प्रयोगशाला से आने वाली जल परीक्षण रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली दंडात्मक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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