आरंग: नगर पालिका परिषद आरंग में पिछले कार्यकाल के दौरान पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर बांटे गए करोड़ों रुपये के ठेके अब प्रशासनिक नाकामी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते दिख रहे हैं। भारी-भरकम बजट खर्च करके बिछाई गई पाइपलाइनों के बावजूद पूरे आरंग शहर में जल संकट गहराया हुआ है। कागजों पर योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन धरातल पर जनता की प्यास बुझने का नाम नहीं ले रही।
नगर के कई हिस्सों समेत विशेष रूप से कृष्णा वार्ड क्रमांक 09 (बरगुङी पारा से सोनी पारा और अग्रसेन चौक तक) में पानी की आपूर्ति लंबे समय से ठप है। नलों में पानी न आने से स्थानीय निवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और रोजमर्रा के कामों के लिए दूर-दराज के हैंडपंपों या टैंकरों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
कागजी आश्वासनों से ऊबी जनता, बैठकों तक सीमित प्रशासन
वार्ड पार्षद पुष्कर साहू ने पूरे नगर की इस गंभीर स्थिति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि चुनाव जीतने के बाद से ही वे नपा प्रशासन को लिखित ज्ञापनों और बैठकों के माध्यम से लगातार जमीनी हकीकत से अवगत करा रहे हैं, लेकिन प्रशासन सिर्फ आश्वासन देने तक सीमित है।
पार्षद साहू ने तीखा हमला बोलते हुए कहा— “जनता को करोड़ों की योजनाओं के आंकड़ों और फाइलों से कोई सरोकार नहीं है, उन्हें सिर्फ अपने घर के नल में नियमित पानी चाहिए। ठेकेदारों के साथ बंद कमरों में बैठकें करने से शहर की प्यास नहीं बुझेगी। विकास का आंकलन कागजों में दर्ज एंट्री से नहीं, बल्कि जनता को मिलने वाली सुविधा से होता है।”
तकनीकी खामियों की आशंका, उठाई 4 प्रमुख जांच मांगें
पूरे नगर में पाइपलाइन बिछने के बाद भी पानी न पहुंचने के पीछे पार्षद साहू ने बड़े पैमाने पर तकनीकी गड़बड़ियों की आशंका जताई है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग करते हुए प्रशासन के समक्ष 4 मुख्य बिंदु रखे हैं:
प्रेशर और फ्लो टेस्ट: प्रभावित इलाकों में तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भेजकर पाइपलाइन के प्रेशर, वॉटर फ्लो और लीकेज का तुरंत परीक्षण कराया जाए।
DPR और मानकों का मिलान: बिछाई गई पाइप का डायमीटर, बिछाने का लेवल और वॉटर प्रेशर स्वीकृत डीपीआर (DPR) व निर्धारित मानकों के अनुसार है या नहीं, इसकी गहन पड़ताल हो।
अस-बिल्ट ड्राइंग की मांग: वास्तविक कार्य की सच्चाई जानने के लिए स्वीकृत योजना की डीपीआर, लेआउट ड्राइंग और ‘अस-बिल्ट ड्राइंग’ सार्वजनिक की जाए।
इंटीग्रेशन और वाल्व जांच: पाइपलाइन में एयर वाल्व, स्कॉर वाल्व और आइसोलेशन वाल्व के सही इस्तेमाल के साथ-साथ पुरानी व नई पाइपलाइन के इंटीग्रेशन की जांच हो, ताकि ब्लॉकेज या एयर-लॉक का पता चल सके।
जिम्मेदारी हो तय : पुष्कर साहू
पार्षद पुष्कर साहू ने कहा कि पिछले कार्यकाल में हुए इस कार्य की जांच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं, बल्कि तकनीकी तथ्यों, दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर होनी चाहिए। यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है, तो आखिर कमी कहां हुई, इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन परिणाम शून्य रहा। पार्षद पुष्कर साहू ने साफ किया है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

