आरंग (विशेष संवाददाता): जीवनदायिनी महानदी का अस्तित्व पहले से ही संकट में है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इसके दोहन की तैयारियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। आरंग तहसील के ग्राम कुरूद में महानदी के खसरा नंबर 2742 के तहत 10 हेक्टेयर (लगभग 25 एकड़) क्षेत्र में रेत खनन की अनुमति देने के लिए पर्यावरण लोकसुनवाई आयोजित की जा रही है। ग्रामीणों द्वारा लगातार किए जा रहे विरोध के बावजूद नई खदान की प्रशासनिक प्रक्रिया ने स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
नियमों की धज्जियां उड़ा रहा रेत माफिया, प्रशासन मौन
क्षेत्रीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन दोहरी नीति अपना रहा है। एक तरफ पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ महानदी के सीने को छलनी करने के लिए खदानों की स्वीकृति दी जा रही है। वर्तमान में संचालित वैध खदानें भी निर्धारित स्वीकृत रकबे से कई गुना अधिक क्षेत्र में अवैध उत्खनन कर रही हैं। खनिज अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण के नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। भारी-भरकम पोकलेन और जेसीबी मशीनों से नदी की प्राकृतिक धारा को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे महानदी के जलस्तर और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecology) पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
अवैध कारोबार, हिंसा और गोलीकांड का अड्डा बना क्षेत्र
कुरूद और आसपास के क्षेत्रों में अवैध रेत खनन और भंडारण का कारोबार चरम पर है। स्थिति यह है कि क्षेत्र में रेत माफिया का वर्चस्व स्थापित हो चुका है:
गोलीकांड और हिंसक झड़पें: कुरूद रेत खदान पहले भी गोलीकांड जैसी संगीन वारदात की गवाह बन चुकी है। आए दिन यहां वर्चस्व और अवैध वसूली को लेकर मारपीट की घटनाएं हो रही हैं।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों पर हमले: रेत का विरोध करने पर ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मारपीट की जाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है।
सड़क दुर्घटनाएं: रेत से लदे अनियंत्रित और ओवरलोड वाहनों की तेज रफ्तार के कारण आए दिन जानलेवा दुर्घटनाएं हो रही हैं।
प्रशासनिक अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी महानदी की दयनीय स्थिति देखने के लिए कभी धरातल पर निरीक्षण करने नहीं आते। खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा अवैध उत्खनन और भंडारण पर की जाने वाली कार्रवाई केवल “खानापूर्ति” तक सीमित रह गई है। कागजी कार्रवाई के नाम पर छोटे-मोटे चालान काटकर बड़े रेत माफियाओं को अभयदान दिया जा रहा है।
जनहित और पर्यावरण संरक्षण हेतु उठते मुख्य सवाल:
क्या 10 हेक्टेयर की नई खदान से महानदी का जलस्तर और संरचना हमेशा के लिए प्रभावित नहीं होगी.?
पुरानी खदानों में नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के बजाय नई खदान को मंजूरी क्यों दी जा रही है.?
रेत माफिया द्वारा फैलाई जा रही हिंसा और अवैध उत्खनन पर सख्त प्रशासनिक रोक कब लगेगी.?
यदि समय रहते कुरूद में प्रस्तावित इस 10 हेक्टेयर रेत खदान की जनसुनवाई और स्वीकृति पर रोक नहीं लगाई गई, तो न केवल महानदी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, बल्कि पूरा क्षेत्र एक बड़े सामाजिक व पर्यावरणीय संकट की आगोश में समा जाएगा। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जनहित, क्षेत्र की शांति और महानदी को बचाने के लिए इस नई खदान की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

