आरंग क्षेत्र में बीते कुछ दिनों से जारी आफत की मूसलाधार बारिश और प्रमुख बांधों से छोड़े गए रिकॉर्ड जल-सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। महानदी के विकराल रूप धारण करने से आरंग तहसील और उससे लगे तटीय ग्रामीण इलाकों में जलप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है और जन-धन की भारी हानि की आशंका बनी हुई है।
त्रिस्तरीय जलप्रवाह से निसदा बैराज पर अभूतपूर्व दबाव
आरंग क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका केवल स्थानीय बारिश का नतीजा नहीं है, बल्कि ऊपरी इलाकों और प्रमुख बांधों से आ रहे भारी जलप्रवाह के कारण स्थिति बेकाबू हुई है।
गंगरेल बांध का तांडव: धमतरी स्थित गंगरेल (रविशंकर सागर) बांध के सभी 14 गेट खोलकर लगभग 2.5 लाख क्यूसेक पानी लगातार महानदी में छोड़ा जा रहा है।
त्रिवेणी संगम का प्रभाव: गंगरेल से छोड़ा गया यह विशाल जलसैलाब राजिम के प्रसिद्ध त्रिवेणी संगम पहुँचकर पैरी और सोंढूर नदियों के उफान के साथ मिल जाता है, जिससे महानदी का प्रवाह अत्यंत घातक रूप ले चुका है।
समोदा और निसदा बैराज की स्थिति: राजिम संगम के बाद यह पानी निसदा बैराज की ओर तेजी से बढ़ रहा है। निसदा बैराज की जल-धारण क्षमता लगभग 1.60 लाख क्यूसेक है, जबकि वर्तमान में यहाँ क्षमता से करीब 3 गुना (4.5 लाख क्यूसेक से अधिक) पानी पहुँच रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए समोदा बैराज के भी सभी 48 गेट खोल दिए गए हैं।
ओवरफ्लो हुई नहरें: निसदा बैराज के दोनों ओर स्थित सुरक्षा दीवारें (शरार) और मुख्य कैनाल पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं और पानी नहरों के ऊपर से खतरनाक वेग से बह रहा है।
दर्जनों गांव जलमग्न, कई इलाकों से संपर्क पूरी तरह टूटा
महानदी और निसदा बैराज के उफान से तटीय क्षेत्रों के हालात अत्यंत भयावह हो चुके हैं। निसदा, गोइंदा, छटेरा, बनचरौदा सहित आसपास के दर्जनों गांवों में महानदी और बैराज का पानी बस्तियों में प्रवेश कर चुका है। गलियां, चौक-चौराहे और लोगों के मकान कई-कई फीट पानी में डूबे हुए हैं।निसदा से गोइंदा को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग जलमग्न हो जाने के कारण निसदा-गोइंदा सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों से संपर्क पूरी तरह कट गया है। आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है।

किसानों पर पड़ा भारी संकट: बाढ़ का सबसे विनाशकारी असर फसलों पर पड़ा है। सैकड़ों एकड़ में लगी धान की लहलहाती फसल पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी है। लगातार कई दिनों तक फसलों के पानी में डूबे रहने से धान के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे क्षेत्र के किसानों के चेहरे पर चिंता और निराशा छा गई है।
युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य: SDRF की टीम तैनात
विनाशकारी बाढ़ की सूचना मिलते ही जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।100 से अधिक लोगों का रेस्क्यू: निसदा के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों से लगभग 100 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत शिविरों में पहुँचाया गया है।
उमरिया में SDRF का ऑपरेशन: ग्राम पंचायत उमरिया में कोल्हान नाला में जलस्तर बढ़ने से लगभग 40 लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं।प्रशासनिक अलर्ट के बाद SDRF (राज्य आपदा मोचन बल) की विशेष टीम नावों और आधुनिक राहत उपकरणों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तुरंत रवाना कर दी गई है।
राहत शिविरों की व्यवस्था: राहत शिविरों में विस्थापित ग्रामीणों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाइयों और ठहरने के समुचित प्रबंध किए जा रहे हैं।

प्रशासनिक अधिकारी अलर्ट मोड पर
स्थिति का जायजा लेने और राहत कार्यों की समीक्षा करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं।आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा ने बताया कि “आरंग क्षेत्र में महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिन स्थानों पर पानी घुसने की समस्या आई है, वहाँ से लोगों को सुरक्षित निकालकर तुरंत राहत शिविरों में भेजा जा रहा है। शिविरों में उनके खाने-पीने और चिकित्सीय व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उमरिया में फँसे लोगों को सुरक्षित निकालने हेतु SDRF की टीम भेजी गई है। सभी तटीय गांवों पर प्रशासनिक टीम लगातार नजर बनाए हुए है।”
प्रशासन की ग्रामीणों से अपील
मौसम विभाग और बाढ़ नियंत्रण कक्ष की चेतावनी के अनुसार यदि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश का क्रम इसी तरह जारी रहा, तो जलस्तर और बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि महानदी, निसदा बैराज, समोदा बैराज और उफान पर चल रहे कैनाल व नालो के पास जाने से बचें।बहते पानी को पार करने का जोखिम न उठाएं। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या जलभराव की सूचना तुरंत स्थानीय कंट्रोल रूम या पटवारी/तहसीलदार को दें।

