आरंग तहसील अंतर्गत एनएच-53 से लगे ग्राम रसनी में राष्ट्रीय राजमार्ग (NHAI) और शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की है। तहसील प्रशासन और पुलिस बल के संयुक्त सहयोग से जेसीबी (JCB) मशीन के जरिए पक्की बाउंड्रीवॉल को ध्वस्त कर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

क्या है पूरा मामला..?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम रसनी (पटवारी हल्का नं. 28) स्थित खसरा नंबर 937 की शासकीय आबादी भूमि और NH-53 के अधिग्रहण क्षेत्र में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा एक शासकीय हैंडपंप लगाया गया था। इस हैंडपंप का उपयोग ग्रामीण और आम नागरिक पेयजल व निस्तारी के लिए करते थे।
वर्ष 2023-24 में स्थानीय निवासी थानसिंग चंद्राकर (पिता मनराखन लाल / मनहरण लाल, उम्र 75 वर्ष) ने शासकीय हैंडपंप को उखाड़कर अपने कब्जे में ले लिया और उस स्थान पर अवैध रूप से पक्की बाउंड्रीवॉल बनाकर निजी समर्सिबल (इलेक्ट्रिक) पंप स्थापित कर लिया। ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच और सचिव द्वारा इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ग्रामीण सूरज शर्मा द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और तहसील न्यायालय आरंग में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई

शिकायत के आधार पर हल्का पटवारी, राजस्व निरीक्षक, कोटवार और ग्रामीणों की उपस्थिति में मौका निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया गया। जांच प्रतिवेदन में शासकीय भूमि और हैंडपंप पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई।
तहसीलदार आरंग के निर्देशानुसार राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण (भूमि एवं यातायात) अधिनियम 2002 की धारा 20, 24, 26 और 27 के तहत बेदखली की कार्रवाई तय की गई। इसके बाद तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर की मदद से अवैध पक्की बाउंड्रीवॉल को पूरी तरह ज़मींदोज़ कर दिया।

15 दिनों में हैंडपंप लगाने की सख्त चेतावनी
तहसीलदार आरंग ने अनावेदक थानसिंग चंद्राकर को कड़ा निर्देश दिया है कि आम जनता के पेयजल उपयोग के लिए अगले 15 दिनों के भीतर शासकीय हैंडपंप को पुनः स्थापित किया जाए। यदि तय समय-सीमा के भीतर हैंडपंप वापस चालू नहीं किया गया, तो प्रशासन द्वारा आगे नियमानुसार और भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

