कहते हैं कि दुनिया में सबसे भारी बोझ पिता के कंधों पर उसके अपने युवा बेटे की अर्थी का होता है। जब यह दुखों का पहाड़ टूटता है, तो जीने की आखिरी वजह भी खत्म हो जाती है। ऐसा ही एक हृदयविदारक मामला आरंग से सामने आया है, जहाँ इकलौते बेटे की असामयिक मौत के गहरे सदमे को एक बुजुर्ग पिता का दिल ज्यादा दिन संभाल नहीं सका।
बिजली विभाग के सेवानिवृत्त लाइन इंस्पेक्टर आरंग निवासी लखन लाल बघेल, जिनका बीते चार महीनों से बेटे के वियोग में स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था, उन्होंने शुक्रवार को आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया।
चार महीने पहले उजड़ गई थी खुशियां
दर्द की यह कहानी बीते 28 मई को शुरू हुई थी, जब लखन लाल बघेल के 41 वर्षीय इकलौते पुत्र आशीष बघेल ने ट्रेन से कटकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। आशीष शासकीय स्कूल में शिक्षक के पद पर पदस्थ थे और पूरे परिवार का एकमात्र सहारा थे।
शिक्षक पुत्र के इस कठोर और अचानक उठाए गए कदम ने हँसते-खेलते परिवार को पल भर में उजाड़ दिया था। बुजुर्ग लखन लाल बघेल के लिए अपने जवान और स्थापित बेटे को खोना ऐसा आघात था, जिससे वे कभी उभर ही नहीं पाए। बेटे के जाने के बाद से ही वे गहरे मानसिक तनाव में रहने लगे थे। सदमे का असर उनके शरीर पर इस कदर पड़ा कि वे गंभीर रूप से बीमार रहने लगे।
जवान बेटे के इस तरह दुनिया से चले जाने के बाद बुजुर्ग पिता का शरीर तो जैसे-तैसे चल रहा था, लेकिन उनकी आत्मा बेटे की यादों में ही अटकी हुई थी। आखिरकार, बीते चार महीनों से तड़प रहे एक लाचार पिता के शरीर ने भी साथ छोड़ दिया और वे अपने बेटे के पास चले गए।
इस दुखद घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। जिसने भी इस पिता-पुत्र की कहानी सुनी, उसकी आँखें नम हो गईं।

