आरंग नगर पालिका क्षेत्र में इन दिनों शासकीय जमीनों पर भू-माफियाओं की नजर लग चुकी है। बैहार और घुमराभाठा जैसे इलाकों में सरकारी जमीनों की धड़ल्ले से हो रही अवैध खरीद-बिक्री ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी कानूनी कागजात के केवल स्टांप पेपर के सहारे इस अवैध खेल को अंजाम दिया जा रहा है।
वार्डवासियों के कब्जे वाली जमीन पर भू-माफिया का डोरा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिन शासकीय जमीनों पर सालों से गरीब और स्थानीय लोग काबिज हैं, उन्हें भी भू-माफिया निशाना बना रहे हैं। इतना ही नहीं, नियमों को ताक पर रखकर कई विवादित और शासकीय जमीनों पर प्रधानमंत्री आवास योजना तक का लाभ दे दिया गया है, जो सीधे तौर पर जांच का विषय है।
चारागाह भी अतिक्रमण की चपेट में, मवेशी बेसहारा
नगर पालिका क्षेत्र में चारागाह की जमीनों पर भी अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा लिया है। इसके चलते मवेशियों के चरने के लिए शहर में उपयुक्त जगह ही नहीं बची है।
शव दफनाने के लिए जमीन तक नहीं, 5 किमी दूर जाने को मजबूर लोग
शहर की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि शव दफनाने के लिए आरंग में जमीन का एक टुकड़ा तक उपलब्ध नहीं है। परिजनों को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार (दफनाने) के लिए लगभग 5 किलोमीटर दूर महानदी के तट पर जाना पड़ता है। एक ओर आम नागरिक अंतिम संस्कार की जमीन के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रसूखदार शासकीय जमीनों को खुलेआम कब्जा रहे हैं।
राजस्व विभाग और नगर पालिका में असमंजस, मामले लंबित
रसूखदारों के दबदबे के कारण अब तक किसी भी बड़े भू-माफिया पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई के नाम पर राजस्व विभाग और नगर पालिका प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। इस प्रशासनिक खींचतान और असमंजस के कारण शासकीय जमीनों से जुड़े दर्जनों विवादित मामले लंबित पड़े हैं और कोई ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए और बेजा कब्जे में फंसी जमीनों को मुक्त कराकर जनहित के कार्यों में उपयोग में लाया जाए।

